बार-बार करते हैं IPO के लिए अप्लाई फिर भी नहीं मिलता अलॉटमेंट, ये है वजह
IPO Allotment: अगर आप भी बार-बार आईपीओ के लिए अप्लाई करते हैं लेकिन अलॉटमेंट नहीं मिलता है तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं. सही से आईपीओ अप्लाई न करना इसके पीछे सबसे बड़ा कारण हो सकता है. ऐसे में आज हम आईपीओ को लेकर ऐसी बातें बताएंगे जिससे आपका अलॉटमेंट अटक सकता है.
IPO Allotment: आज के जमाने में IPO में पैसे लगाने का क्रेज बढ़ तेजी से बढ़ रहा है. खासकर रिटेल निवेशकों को इसका चस्का ज्यादा लग गया है, जिसका एक बार आईपीओ निकल जाता है, फिर उनकी उम्मीदें और बढ़ जाती हैं. लेकिन कुछ ऐसे भी लोग होते हैं जो बार-बार आईपीओ के लिए अप्लाई करते हैं लेकिन उन्हें अलॉटमेंट नहीं मिलता है…फिर मन में सवाल उठने लगता है कि कहीं कोई गड़बड़ी तो नहीं है. अगर आपके साथ भी ऐसा हुआ है तो आइए जानते हैं इसके पीछे के कुछ कारण…
क्या होता है आईपीओ?
जब कोई कंपनी पहली बार अपने शेयर पब्लिक को ऑफर करती है तो उसे आईपीओ कहते हैं. आईपीओ के जरिए कंपनी फंड इकट्ठा करती है और उस फंड को कंपनी की तरक्की में खर्च करती है. बदले में आईपीओ खरीदने वाले लोगों को कंपनी में हिस्सेदारी मिल जाती है. IPO में जो शेयर अलॉट होते हैं, वो आमतौर पर BSE या NSE जैसे स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होते हैं. जहां लोग इन शेयरों की आराम से खरीद बिक्री कर सकते हैं.
अलग है आईपीओ अलॉटमेंट का सिस्टम
दरअसल, निवेशक आईपीओ अलॉटमेंट के प्रक्रिया को बारीकी से समझना चाहते हैं. क्योंकि अच्छी कंपनी के आईपीओ हमेशा ओवरसब्सक्राइब होता है, यानी आईपीओ में मौजूद शेयर से कई गुने ज्यादा निवेशकों के आवेदन मिल जाते हैं, फिर सबको शेयर अलॉट नहीं हो पाते. इसके पीछे कई कारण हैं आइए जानते हैं…
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किसके लिए कितना होता है रिजर्व
रिटेल निवेशक-
सेबी के नियम के मुताबिक एक रिटेल निवेशक मैनबोर्ड IPO में अधिकतम 2 लाख रुपये तक की बोली लगा सकता है. NRI या HUF इस कैटेगरी के तहत आता है. इस कैटेगरी के लिए IPO के 35% शेयर आरक्षित हैं. आवंटन दिवस तक बिड निकासी की जा सकती है. ओवरसब्सक्रिप्शन के मामले में, न्यूनतम बिड लॉट आवंटित किया जाएगा.
नॉन-इंस्टीटूशनल निवेशक NII-
नॉन-इंस्टीटूशनल निवेशकों को 2 हिस्सों में आईपीओ में जगह मिलती है. स्मॉल NII और बिग NII स्मॉल NII 10 लाख से कम निवेश करने के लिए एलिजिबल होते हैं जबकि बिग NII 10 लाख से ज्यादा का निवेश कर सकते हैं.
क्वॉलिफाइइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB)-
ये नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर हैं जो SEBI के साथ रजिस्टर्ड हैं. ये आईपीओ में 10 लाख या उससे ज्यादा का निवेश कर सकते हैं. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक, सार्वजनिक वित्तीय संस्थान और म्यूचुअल फंड इस श्रेणी के तहत आवेदन करने के पात्र हैं. इन्वेस्टर की इस श्रेणी के लिए कंपनियों को IPO के कम से कम 50% शेयर रिज़र्व करना अनिवार्य है. IPO में इन्वेस्ट करने के लिए इन इन्वेस्टर को पहले SEBI के साथ रजिस्टर करना होगा.
एंकर निवेशक-
एंकर निवेशक योग्य संस्थागत खरीदार होते हैं जिन्हें आईपीओ के सब्सक्रिप्शन के लिए खुलने से ठीक पहले आईपीओ में शेयर ऑफर किए जाते हैं. ये आईपीओ में 10 करोड़ तक निवेश कर सकते हैं.
एम्प्लाइज-
जिस कंपनी का आईपीओ बाजार में आया है अगर उसके कर्मचारी आईपीओ में निवेश करना चाहते हैं तो उनके लिए अलग से इसमें हिस्सेदारी होती है. किसी भी कंपनी के कर्मचारी अपनी कंपनी का आईपीओ लेने के लिए इसमें अप्लाई कर सकते हैं.
अगर IPO में जितने शेयर ऑफर किए जाते हैं, उतने ही आवेदन मिलने पर लगभग सभी निवेशकों को आईपीओ में शेयर अलॉट हो जाते हैं. लेकिन जब आईपीओ ओवरसब्सक्राइब हो जाता है तो फिर अलॉटमेंट थोड़ा जटिल हो जाता है. ऐसी स्थिति में अलॉटमेंट प्रक्रिया के लिए कुछ
आईपीओ अलॉटमेंट के नियम
आईपीओ में निवेश करने से पहले हमें आईपीओ अलॉटमेंट के नियम को समझना चाहिए. जब भी कोई अच्छी कंपनी आईपीओ खोलती हो तो अक्सर वह ओवरसब्सक्राइब हो जाता है. ओवरसब्सक्राइब का मतलब होता है कि उस आईपीओ में कई गुना ज्यादा निवेशकों ने आवेदन दिया है. इस वजह से सभी निवेशकों को शेयर अलॉट नहीं होता है.
- शेयर अलॉट करने के लिए लकी ड्रॉ का भी इस्तेमाल किया जाता है. कई निवेशक अपने परिजनों के नाम पर भी बोली लगाते हैं. ऐसे में शेयर अलॉटमेंट की संभावना बढ़ जाती है.
- जिस आईपीओ की भारी डिमांड है उसके ज्यादा से ज्यादा लॉट के लिए अप्लाई करें. एक रिटेल निवेशक मेनबोर्ड आईपीओ में 2 लाख रुपये तक दांव लगा सकता है.
- वहीं, अलग-अलग पैन कार्ड के जरिए खोले गए डीमैट अकाउंट से भी आईपीओ के लिए अप्लाई करना चाहिए. ऐसे में आईपीओ अलॉटमेंट की संभावनाएं बनी रहती हैं.
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IPO का खेल: बजाज ने कराई ताबड़तोड़ कमाई तो यहां मिली निराशा
IPO Listing: पिछले हफ्ते बाजार में एंट्री करने वाले बजाज हाउसिंग फाइनेंस के आईपीओ ने जहां निवेशकों को ताबड़तोड़ कमाई कराई है वहीं, क्रॉस लिमिटेड और टॉलिन्स टायर्स से निवेशकों को निराशा मिली है. दोनों कंपनियों के आईपीओ की लिस्टिंग शेयर बाजार में फ्लैट रही. आइए जानते हैं कैसा रहा तीनों कंपनियों का शेयर बाजार में डेब्यू...
IPO Listing: पिछले हफ्ते बाजार में 3 कंपनियों के आईपीओ आए थे. बजाज हाउसिंग फाइनेंस, क्रॉस लिमिटेड और टॉलिन्स टायर्स. तीनों आईपीओ को निवेशकों की तरफ से जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला था. लेकिन लिस्टिंग के बाद सिर्फ एक आईपीओ ने निवेशकों को खुश किया है बाकि 2 आईपीओ से उनको निराशा हाथ लगी है. जी हां, पिछले हफ्ते बाजार में एंट्री करने वाले बजाज हाउसिंग फाइनेंस के आईपीओ ने जहां निवेशकों को ताबड़तोड़ कमाई कराई है वहीं, क्रॉस लिमिटेड और टॉलिन्स टायर्स से निवेशकों को निराशा मिली है. बजाज हाउसिंग फाइनेंस ने निवेशकों को लिस्टिंग के बाद दोगुना मुनाफा दिया है. आइए जानते हैं कैसा रहा तीनों कंपनियों का शेयर बाजार में डेब्यू…
क्रॉस लिमिटेड आईपीओ की लिस्टिंग
वाहनों के कल-पुर्जे बनाने वाली कंपनी क्रॉस लिमिटेड के शेयर पिछले सप्ताह आए आईपीओ के बाद आज सोमवार को बाजार पर लिस्ट हो गए. कंपनी के शेयरों की शुरुआत फ्लैट हुई. यानी आईपीओ के निवेशक को शेयरों की लिस्टिंग पर कोई कमाई नहीं हो पाई और उन्हें निराश होना पड़ गया.
क्रॉस लिमिटेड का शेयर आज सुबह बीएसई और एनएसई पर 240 रुपये के भाव के साथ लिस्ट हुआ. आईपीओ में कंपनी ने 228 से 240 रुपये का प्राइस बैंड तय किया था और उसके एक लॉट में 62 शेयर शामिल थे. इस हिसाब से देखें तो क्रॉस लिमिटेड के आईपीओ का एक लॉट खरीदने पर 14,880 रुपये लगाने पड़े थे. चूंकि लिस्टिंग अपर प्राइस बैंड के बराबर भाव पर हुई है, निवेशकों को कोई कमाई नहीं हो पाई है.
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टॉलिन्स टायर्स
टॉलिन्स टायर्स लिमिटेड के शेयरों ने सोमवार 16 सितंबर को अपनी लिस्टिंग पर निवेशकों को मायूस किया. कंपनी के शेयर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर 227 रुपये के भाव पर लिस्ट हुए, जो इसके 226 रुपये के इश्यू प्राइस से महज 0.4 फीसदी अधिक है. यह लिस्टिंग ग्रे मार्केट के अनुमानों से भी बिल्कुल उलट रही, जहां इसके शेयर आखिरी समय तक 13 फीसदी के प्रीमियम पर कारोबार कर रहे थे.
टॉलिन्स टायर्स का IPO पिछले हफ्ते 9 से 11 सितंबर तक बोली के लिए खुला था. कंपनी ने अपने शेयरों के लिए 215-226 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया था. इसके IPO का कुल साइज 230 करोड़ रुपये था. इसमें से 200 करोड़ रुपये नए शेयरों की बिक्री से जुटाए गए हैं. वहीं 30 करोड़ रुपये के शेयर कंपनी के प्रमोटरों की ओर से बिक्री के लिए रखा गया था.
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टॉलिन्स टायर्स के IPO को निवेशकों से शानदार प्रतिक्रया मिली थी और यह आखिरी दिन कुल 25.03 गुना अधिक सब्सक्रिप्शन के साथ बंद हुआ था. कंपनी को सबसे अधिक नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) के कैटेगरी में मिली, जिन्होंने अपने लिए आरक्षित शेयरों के हिस्से को 28.80 गुना अधिक सब्सक्राइब किया. वहीं क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) और रिटेल कैटेगरी में कंपनी को क्रमश: 26.72 गुना और 22.45 गुना अधिक बोली मिली.
बजाज फाइनेंस ने कराई ताबड़तोड़ कमाई
शेयर बाजार में दिनभर की ट्रेडिंग के अलावा 16 सितंबर का दिन एक अलग वजह से भी खास रहने वाला है. आज इस साल के सबसे चर्चित IPOs में शामिल Bajaj Housing Finance के IPO की धमाकेदार लिस्टिंग हुई है. इस आईपीओ पर सबकी नजरें थीं और इसे जबरदस्त रिस्पॉन्स भी मिला था. ग्रे मार्केट में धमाल मचाने के बाद शेयर मार्केट में भी इसकी जबरदस्त एंट्री हुई है. लिस्टिंग वाले दिन ही इसने निवेशकों को जबरदस्त मुनाफा दे दिया है. एक ही दिन में इसने निवेशकों की रकम को दोगुना कर दिया.
बीएसई और एनएसई दोनों पर यह 114.29 फीसदी प्रीमियम के साथ 150 रुपये पर लिस्ट हुआ. लिस्टिंग के बाद भी शेयर में तेजी का सिलसिला जारी है. कुछ ही देर में देखते ही देखते शेयर 161 रुपए जो इसका दिन का हाई है उसको भी पार गया.
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Source by. Online,tv9 bharti
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